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Physical appearance of a person with navamsa chart नवमांश कुंडली से पता करें शारीरिक बनावट

 

  • ज्योतिष शास्त्र में लिखा है कि लग्न के नवमांशाधिपति से, अथवा जो ग्रह सबसे बलवान् हो, उससे जातक के शरीर की आकृति, गठन इत्यादि बातों का निर्णय किया जाता है।
  • सूर्य यदि लग्न का नवांशपति हो अर्थात् सूर्य के नवमांश में जन्म होने से अथवा सूर्य के बलवान होने से जातक मोटा और चिपटा गठन का होगा।
  • चन्द्रमा के नवमांश में जन्म होने व चन्द्रमा के बली रहने से जातक उन्नत- देह, सुन्दर नेत्र, कृष्ण-वर्ण और कुछ घुँघराले बाल वाला होता है।
  • मंगल के नवांश में जन्म होने से किञ्चित नाटा, नेत्र पिंगल-वर्ण और दृढ़ शरीर अर्थात मजबूत गठन का होता है।
  • बुध के नवांश में जन्म होने से कद मझला परन्तु देखने में अच्छा, आँख का कोना लाल और शरीर की नसे निकली हुई प्रतीत होती है।
  • बृहस्पति के नवांश में जन्म होने से आँख किञ्चित पिंगल-वर्ण, आवाज खूब गम्भीर, वक्षस्थल तथा छाती खूब चौड़ी और ऊँची परन्तु देखने में खूब ऊँचा नहीं होता है अर्थात् मंझला कद होता है।
  • शुक्र के नवांश में जन्म होने से भुजा लम्बी, मुख और ठोड़ी स्थूल, विलास- प्रिय, चंचल और सुन्दर नेत्र और पार्श्ववर्ती स्थान अर्थात् कंधा के नीचे का भाग इत्यादि स्थूल होता है।
  • शनि के नवांश में जन्म होने से आँख का निम्न भाग धंसा हुआ, शरीर दुबला, आकृति में लम्बा और नस तथा नख स्थूल होते हैं। कमर से नीचे का भाग प्रायः कृष्ण होता है।
  • लग्न में यदि कोई ग्रह हो अथवा किसी ग्रह की पूर्ण दृष्टि हो तो उपर्युक्त फलों में कुछ भेद पड़ जाता है। अर्थात् नवांशपति के अनुसार लग्न रहने पर भी लग्न में जो ग्रह बैठा हो, अथवा लग्न को जो देखता हो, उस ग्रह के प्रभाव का भी कुछ आभास पड़ जाता है।
  • इसी प्रकार कुंडली के किसी ग्रह का उच्च तथा बलवान होने के कारण उस ग्रह का भी प्रभाव पड़ जाता है। परन्तु यदि कोई बली ग्रह लग्न में पड़ता हो, अथवा लग्न पर उसकी पूर्ण दृष्टि हो तो उस ग्रह का लक्षण विशेष रूप से जातक के गठनादि में प्रतीत होता है।

(रंग)

  • मनुष्य के शरीर का रंग चन्द्रमा के नवांश के अनुसार होता है। लग्ननवांश के अनुसार शरीर की आकृति आदि होती है और चन्द्रमा जिस नवांश में होता है, उसके अधिपति के अनुसार जातक का रंग होता है।
  • यह भी माना गया है कि जो ग्रह ठीक लग्नस्फुट के समीपवर्ती होता है, उसके अनुसार भी रंग में भेदाभेद होता है।
  • (3) चन्द्रमा यदि सूर्य के नवांश में हो तो जातक का रंग श्यामवर्ण होगा।
  • चंद्रमा यदि स्व नवांश में हो तो गौरवर्ण होगा।
  • चन्द्रमा यदि मंगल के नवांश में हो तो जातक रक्त-गौर-वर्ण होगा।
  • चन्द्रमा यदि बुध के नवांश में हो तो श्यामवर्ण होगा।
  • चन्द्रमा यदि बृहस्पति के नवांश में हो तो जातक तप्तकाञ्चन वर्ण होगा।
  • चन्द्रमा यदि शुक्र के नवांश में हो तो जातक का रंग श्यामवर्ण परन्तु चित्ताकर्षक होगा।
  • चन्द्रमा यदि शनि के नवांश में हो तो जातक का रंग काला होगा ।
  • सूर्य लग्न में हो तो जातक ताम्रवर्ण होगा।
  • चन्द्रमा लग्न में रहने से गौरवर्ण होगा।
  • मंगल लग्न में हो तो रक्त-गौर-वर्ण होगा।
  • बुध लग्न में हो तो साफ श्यामवर्ण होगा अर्थात् काला नहीं होगा।
  • बृहस्पति लग्न में हो तो जातक का रंग काञ्चनवर्ण और अत्यन्त चित्ताकर्षक होगा।
  • शुक्र लग्न में हो तो रंग गोरा न होगा पर चित्त को आकषित करने वाला होगा।
  • शनि लग्न में हो तो काला वर्ण होगा।
  • यहाँ पर शास्त्रकारों का कहना है कि चन्द्रमा के नवमांशपति और लग्न स्फुट के समीपवर्ती यदि कोई ग्रह हो तो दोनों के मिश्रित रंग का अनुमान करना होगा।

 

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