2025 diwali date | 2025 diwali kab hai | diwali 2025
श्रीमद्भागवत और विष्णुधर्मोत्तर पुराण के अनुसार समुद्र मंथन से कार्तिक महीने की अमावस्या पर लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसके बाद लक्ष्मी पूजन की परंपरा शुरू हुई।
ब्रह्म पुराण की कथा के अनुसार महाराज पृथु ने पृथ्वी दोहन कर इसे धन-धान्य से समृद्ध बनाया, इसलिए दीपावली मनाते हैं।
मार्कंडेय पुराण के अनुसार जब पृथ्वी पर केवल अंधेरा था तब एक तेज प्रकाश के साथ कमल पर बैठी देवी प्रकट हुईं थी जो लक्ष्मी थी। उनके प्रकाश से ही संसार बना इसलिए इस दिन लक्ष्मी पूजा की परंपरा हैं। वहीं, श्रीराम के अयोध्या लौटने के स्वागत में दीपावली मनाने की परंपरा है।
एक अहोरात्र में 8 प्रहर होते है जिसमे 4 प्रहर दिन के व 4 प्रहर रात्रि के होते है। प्रत्येक स्थान में सूर्यास्त का समय भिन्न होता है इसलिए प्रदोष काल में भिन्नता पायी जाती है। प्रदोष काल निर्धारण के सम्बन्ध में अलग-अलग मत है। एक मतानुसार सूर्यास्त के 72 मिनट पहले से और 72 मिनट बाद तक प्रदोष काल माना जाना चाहिए। हम यहाँ पर इसी एक मत की बात कर रहे हैं। एक अहोरात्र में 60 घटी होती है। एक अहोरात्र में कुल 30 मुहूर्त होते है जिनमे दिन के 15 व रात्रि के 15 मुहूर्त होते है। 1 मुहूर्त 2 घटी का होता है, अर्थात 48 मिनट का होता है। अतः 1 ½ मुहूर्त 72 मिनट का सूर्यास्त से पहले व 1 ½ मुहूर्त 72 मिनट का सूर्यास्त के बाद, इस प्रकार कुल 3 मुहूर्त प्रदोषकाल होता है। इस प्रकरण में अमावस्या प्रदोष में त्रिमुहूर्त व्यापिनी होनी चाहिए।
हम दिल्ली के प्रदोषकाल में अमावस्या को देखते हैं।
- अमावस्या तिथि प्रारंभ 20 अक्टूबर को 3:44 pm के बाद।
- अमावस्या तिथि समाप्त 21 अक्टूबर को 5:54 pm पर।
- सूर्यास्त होगा 05:46 pm बजे।
- प्रदोष काल – सूर्यास्त समय में 72 मिनट घटाने पर, 5:46 – 72 मिनट= 4:34 pm से प्रारंभ।
- सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल के 72 मिनट जोड़ने पर 5:46 + 72 = 6:58 बजे तक।
- 20 अक्टूबर को अमावस्या तिथि प्रदोषकाल के प्रारंभ होने के पहले से ही है। अतः त्रिमुहूर्त्त व्यापिनी है। यह सम्पूर्ण रात्रिकाल में है।
- 21 अक्टूबर को अमावस्या 05:54 pm तक ही है। अतः त्रिमुहूर्त्त व्यापिनी नहीं है। रात्रिकाल में नहीं है।
- हस्त नक्षत्र होगा 20 अक्टूबर को 8:17 pm तक। उसके बाद चित्रा नक्षत्र रहेगा।
- 20 अक्टूबर 2025 को अमावस्या 3:44 pm से प्रारंभ होगी व पूरी रात्रि में रहेगी। अतः अमावस्या रात्रिकाल में 20 अक्टूबर की रात्रि में ही प्राप्त होंगी।
- लक्ष्मी पूजन कार्त्तिक अमावस्या की रात्रिकाल का पर्व है।
- प्रदोषकाल में त्रिमुहूर्त्त व्यापिनी कार्त्तिक अमावस्या को दीपपूजन का विधान है। रात्रिकाल में लक्ष्मी पूजन करने का निर्देश है।
- 21 अक्टूबर को सूर्यास्त 05:45 pm पर है। अमावस्या 5:54 pm तक है। अर्थात सूर्यास्त के बाद केवल 9 मिनट तक ही है। यह प्रदोषकाल में त्रिमुहूर्त व्यापिनी नहीं है।
अतः 20 अक्टूबर 2025 को दीपपूजन व लक्ष्मी पूजन का पर्व मनाना चाहिए।
हम इतना ध्यान रखेंगे कि दिवाली दीपमालिका का त्योंहार है जो श्री राम के अयोध्या लौटने की खुशी में दीयों का प्रकाश कर मनाया जाता है। लक्ष्मी पूजा या काली पूजा एक साधना है, एक पूजा है जो कार्तिक अमावस्या की रात्रि में की जाती है। ये दो अलग अलग पूजा है:
- दीपमालिका पूजन– भगवान श्री राम के युद्ध विजय कर अयोध्या लौटने की खुशी में कार्तिक अमावस्या को प्रदोषकाल में।
- लक्ष्मी या काली पूजन– कार्तिक अमावस्या को प्रदोषकाल से लेकर रात्रि में विभिन्न मुहूर्त व लग्नानुसार।
दिवाली पूजन कब किया जाना चाहिए इसके जो नियम बताये गये हैं वे दीपमालिका पूजन के लिए है। इनमे लक्ष्मी पूजन के मुहूर्त लग्नादि का उल्लेख नहीं है। लक्ष्मी पूजन के अलग नियम है। आज के समय में मनुष्य लक्ष्मी पूजन को ही प्रधानता देता है अतः इन नियमों को लक्ष्मी पूजन के नियम मान लेता है जबकि ये नियम व शास्त्राज्ञा दिवाली पूजन अर्थात दीपमालिका पूजन के लिए है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दिवाली का त्योंहार अर्थात दीपमालिका का त्योंहार।
अतः अमावस्या 20 अक्टूबर 2025 को सम्पूर्ण रात्रि में है।
अतः लक्ष्मी व काली पूजन 20 अक्टूबर की रात्रि को ही करना चाहिए।
दीपमालिका प्रज्ज्वलन व पूजन भी 20 अक्टूबर को प्रदोषकाल में करना चाहिए। व्यापारिक प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी पूजन यदि दिन में करना हो तो 21 अक्टूबर को अमावस्या के रहते अर्थात 5:54 pm तक कर सकते है परंतु सर्वोत्तम 20 अक्टूबर को प्रदोष से लेकर रात्रिकाल में ही रहेगा।
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लक्ष्मी पूजा सोमवार, अक्टूबर 20, 2025 को विभिन्न मुहूर्त:-
प्रदोष काल मुहूर्त
- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त – 07:08 pm से 08:18 pm
- प्रदोष काल – 05:46 pm से 08:18 pm
- वृषभ लग्न – 07:08 pm से 09:03 pm
निशिथ काल मुहूर्त
- 11:41 pm 20 अक्टूबर से 12:31 am 21 अक्टूबर
- सिंह लग्न – 01:38 am से 03:56 am, 21 अक्टूबर
चौघड़िया पूजा मुहूर्त
- अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 03:44 pm से 05:46 pm, 20 अक्टूबर
- सायंकाल मुहूर्त (चर) – 05:46 pm से 07:21 pm 20 अक्टूबर
- रात्रि मुहूर्त (लाभ) – 10:31 pm 20 अक्टूबर से 12:06 am, 21 अक्टूबर
- उषाकाल मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 01:41 am से 06:26 am, 21 अक्टूबर
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