Rahu effects | Rahu effects in life | Special effects of Rahu | Rahu dasha | part 2
राहु और केतु के बारे में प्राचीनकाल से ही ज्ञान विद्यमान है। यह ज्ञात तथ्य से स्पष्ट है कि हजारों साल पहले हमारे पूर्वज ग्रहणों का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम थे। उन्होंने इन बिंदुओं के साथ जो नाम जोड़े, उनका तदनुसार लिखे गए ड्रैगन नामक एक राक्षस के रूप में इन बिंदुओं का प्रभाव थोड़ी भिन्नता के साथ, चित्रित करने के लिए उपयोग किया गया था।
वैज्ञानिक विचार ने इसका खंडन किया है परंतु ज्योतिषीय अध्ययन में राहु और केतु का महत्व है।
यद्यपि दो महत्वपूर्ण तरीकों से इस विचार की खोज की गई है कि यह केवल महत्वपूर्ण गणितीय बिंदु है। कुंडली में पृथ्वी को ही प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।
एक है पृथ्वी की स्थिति, पृथ्वी की वार्षिक गति का संदर्भ और इसके द्वारा दी गई सूर्य की स्पष्ट स्थिति। दूसरा विशेष है जब जन्म होता है, उस स्थान का बिंदु और समय का क्षण और इसी को जन्म लग्न कहते है।
सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की यात्रा होती है। राहु और केतु इंगित करते हैं कि चंद्रमा भी सूर्य-पृथ्वी के संरेखण में है। इस प्रकार तीन निकायों के बीच एक अधिक सटीक तालमेल संभव बनता है और इंगित करता है कि कौन सा सटीक बिंदु है। राशि चक्र से ऐसे तालमेल के मुख्य प्रभावों का अनुमान लगाया जा सकता है।
ये ग्रहों से भी कई गुना अधिक अद्भुत प्रभाव उत्पन्न करते हैं।
राहु और केतु एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत स्थिति में होते हैं। इन नोड्स के प्रभाव पर एक साथ विचार किया जाना चाहिए।
ये मन और सांसारिक भाग्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डालते हैं। पारलौकिक गतिविधियों और हमारे सांसारिक मामलों के बीच सामंजस्य को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
राशि और ग्रहों का प्रभाव, लग्न और मध्य आकाश तथा अन्य महत्वपूर्ण बिंदु ईश्वर की लिखावट ही तो है। इनका उपयोग केवल हमारे मार्गदर्शन के लिए किया जाता है।
विनिमय, सट्टा, जुआ और कैसिनो इन सभी व्यवसायों के लिए भी राहु जिम्मेदार होता है।
नैऋत्य दिशा का कारक राहु होता है। यहीं पर इसका प्रभाव विशेष रूप से प्रबल होता है।
फिल्म उद्योग में शुक्र व राहु का प्रभाव होता है।
घर का नैऋत्य अर्थात् दक्षिण-पश्चिम भाग बंद व भारी होना चाहिए। इस दिशा में घर या अपार्टमेंट का प्रवेश द्वार सबसे प्रतिकूल होता है।
राहु उन सभी चीज़ों का प्रतिनिधित्व करता है जो प्राकृतिक नहीं हैं।
बिजली राहु का प्रतिनिधित्व करती है। प्रतिबिम्ब, विडिओ आदि राहु का प्रतिनिधित्व करते है।
भ्रष्टाचार, तस्करी, व्यभिचार आदि को राहु प्रभावित करता है। कलियुग में राहु का प्रभाव अधिक होता है।
राजनीति में भी राहु का प्रबल प्रभाव होता है। षड्यंत्रपूर्वक चुनाव जीतना, चुनाव में अपार धन खर्च करना, चुनाव के लिए मीडिया और पी.आर. का उपयोग करना ये सब राहु के कारण से ही होता है।
प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बलवान राहु रातोंरात शक्तिशाली बना सकता है।
राहु क्रांति का ग्रह है। अतः यह राजनीति में व व्यवसाय में परिवर्तन करता रहता है, विशेष रूप से राशि बदलते समय।
बुध, राहु की युति संचार कौशल, कम्प्युटर ज्ञान व व्यंग्य शक्ति प्रदान करती है तथा हास्य कलाकार भी बना देती है।
बलवान राहु आंतरिक व गूढ ज्ञान और दूसरों के अंतर्मन को समझने की क्षमता देता है।
जिन ग्रहों के साथ यह जुड़ा हुआ होता है, यह उनका फल प्रदान करता है व अपने मूल गुण और स्वभाव को खो देता है। राहु जिस ग्रह के साथ होता है उसी ग्रह की ऊर्जा को दर्शाता है।
इसका सावधानीपूर्वक विश्लेषण आवश्यक है कि यह किस राशि में स्थित है व किस ग्रह से इसका संबंध है।
रात्रि 10 बजे से 2 बजे तक राहु विशेष रूप से बलवान होता है।
इस अवधि के मध्य अधिकांश अपराध और दुर्घटनाएँ होती है।