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ram mandir ayodhya | ayodhya ram temple | यात्रा से पूर्व ये करें तो विघ्न दूर होंगे |

 

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ram mandir ayodhya | ayodhya ram temple | यात्रा से पूर्व ये करें तो विघ्न दूर होंगे |

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भगवान श्री राम का नाम स्वयं में एक महामंत्र है। राम नाम की महिमा अपरंपार है। राम नाम का मंत्र सर्व रूप मे ग्रहण किया जाता है। इस के जप से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति सहज हो जाती है। अन्य नामों की तुलना में राम नाम हजार नामों के समान है। राम मंत्र को तारक मंत्र भी कहा जाता है। इस मंत्र के जपने से सभी दुःखों का अंत होता है।

राम मणिपुर अर्थात् नाभि चक्र का बीज मंत्र है। यह निज शक्ति का स्रोत है। यह ऊर्जा से कंपन होकर नाभिचक्र को सक्रिय करता है।

मणिपुर चक्र सात प्रमुख चक्रों में से तीसरा है और यह आत्मविश्वास बढ़ाता है, चिंता को कम करता है और नकारात्मक आवेगों को नियंत्रित करता है। मणिपुर परिवर्तनकारी शक्ति और आंतरिक शक्ति से जुड़ा है, ये दोनों तब प्रकट होते हैं जब योगी राम का जप करता है।

 

अयोध्या में श्री रामलला शुभ मुहूर्त में विराजमान होंगे। श्री रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 पौष मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि सोमवार को अभिजित मुहूर्त, एन्द्र योग, मृगशिरा नक्षत्र, मेष लग्न और वृश्चिक नवांश में होगी जो दिन के 12 बजकर 29 मिनट 08 सेकंड से 12 बजकर 30 मिनट 32 सेकंड तक अर्थात 84 सेकंड का होगा। इसी समय में प्रभु श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।

देश के कोने कोने से लोग अयोध्या जाएंगे। अतः अपनी सुविधानुसार यात्रा मुहूर्त नहीं ले पाएंगे। यदि आप अयोध्या जा रहे हैं तो आपकी यात्रा शुभ हो और आपको प्रभु श्री राम के दर्शन हो व आप पर प्रभु की कृपा प्राप्ति हो तो इस उद्देश्य से यात्रा से पूर्व भगवान श्री राम के चित्र के समक्ष पूर्वाभिमुख बैठकर इस प्रकार से बाल स्वरूप का ध्यान करें:-

श्री अवधेसके द्वारें सकारें गई सुत गोद कै, भूपति लै निकसे।

अवलोकि हौं सोच बिमोचनको ठगि-सी रही, जे न ठगे धिक-से।।

तुलसी मन-रंजन रंजित-अंजन नैन सुखंजन-जातक-से।।

सजनी ससिमें समसील उभै नवनील सरोरूह -से बिकसे।1।

 

 

 

पग नूपुर औ पहुँची करकंजनि मंजु बनी मनिमाल हिएँ।

नवनीत कलेवर पीत झँगा झलकै पुलकैं नृपु गोद लिएँ।

अरबिंदु से आननु रूप मरंदु अनंदित लोचन -भृंग पिएँ।

मनमो न बस्यौ अस बालकु जौं तुलसी जगमें फलु कौन जिएँ।2।

 

 

 

तनकी दुति स्याम सरोरूह लोचन कंजकी मंजुलताई हरैं।

अति सुंदर सोहत धूरि भरे छबि भूरि अनंगकी दुरि धरैं।

दमकैं दँतियाँ दुति दामिनि-ज्यों किलकैं कल बाल-बिनोद करैं।

अवधेस के बालक चारि सदा तुलसी-मन -मंदिर में बिहरैं।3।

 

 

 

 

बर दंतकी पंगति कुंदकली अधराधर-पल्लव खेलनकी।

चपला चमकैं घन बीच जगैं छबि मोतिन माल अमोलनकी।।

घुँघरारि लटैं लटकैं मुख ऊपर कुंडल लोल कपोलनकी।

नेवछावरि प्रान करैं तुलसी बलि जाउँ लला इन बोलनकी।4।

 

 

 

पदकंजनि मंजु बनीं पनहीं धनुहीं सर पंकज-पानि लिएँ।

लरिका सँग खेलत डोलत हैं सरजू-तट चौहट हाट हिएँ।

तुलसी अस बालक सों नहिं नेहु कहा जप जाग समाधि किएँ।

नर वे खर सूकर स्वान समान कहै जगमें फलु कौन जिएँ।5।

 

इसके अलावा आप राम रक्षा स्तोत्र भी पढ़ सकते हैं।

इसके पश्चात् 108 बार अर्थात् एक माला इस मंत्र की जपें:-

राम क्लीम्।

इस राम मंत्र का प्रयोग अनिष्ट शक्तियों से रक्षा के लिए किया जाता है। ये शक्तियां नकारात्मक मानसिकता, अदृश्य शक्तियां आदि हो सकती हैं।

इसके पश्चात् यह मंत्र बोलते हुए रवाना हो जाए:-

प्रविसि नगर कीजे सब काजा। हृदय राखि कौशलपुर राजा।

जब आप रेलगाड़ी आदि में बैठे हों तो यात्रा के दौरान अपने मन में इस मंत्र का स्मरण करते रहें:-

‘श्री राम जय राम जय जय राम’

यह सात शब्दों वाला तारक मंत्र है। इसकी शक्ति अद्भुत है।

इस प्रकार से राम जन्मभूमि की यात्रा करने से आपके सभी विघ्न दूर होंगे और आप पर प्रभु श्री राम की पूर्ण कृपा होगी।

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