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Political changes | prediction | in India | राजनैतिक परिवर्तन | भविष्यवाणियाँ |


क्या परिवर्तन का दौर है, सरकारों में होगा परिवर्तन?
क्या आगामी समय में देश की राजनैतिक स्थिति में
परिवर्तन होगा? केंद्र में NDA की सरकार है। देखते हैं कि इस सरकार का भविष्य क्या है? हम ग्रहों की आगे आने वाली गोचर स्थिति पर विचार करते हैं।

-29 मार्च 2025 को शनि मीन राशि में।
-15 मई 2025 –बृहस्पति मिथुन राशि में।
-30 मई 2025 राहु कुम्भ राशि में और केतु सिंह राशि में शुद्ध गति से।

इस गोचर कुंडली में ग्रहों को देख सकते हैं।
एकादश भाव संसद का होता है। प्रथम भाव देश की स्थिरता का व छठा भाव संघर्ष का होता है। दशम भाव प्रधानमंत्री, सरकार व केंद्र सरकार की स्थिरता का होता है। राहु राजनैतिक परिवर्तन देता है। शनि लोकतान्त्रिक प्रक्रिया करता है।
अप्रैल 2025 के अंत से गोचर स्थिति के अनुसार शनि, शुक्र, राहु व बुध मीन राशि में रहेंगे। शनि, शुक्र व राहु ग्रहयुद्ध की स्थिति में रहेंगे। शनि, सूर्य व शुक्र 28 अप्रैल 2025 से सिंह नवांश में रहेंगे। शनि व शुक्र शनि के नक्षत्र उत्तराभाद्रपद में होंगे।
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स्वतंत्र भारत की कुंडली में शुक्र कुंडली का लग्नेश व षष्ठेश है। शनि दशमेश है, यह लोकतंत्र का कारक ग्रह है।
सिंह राशि इस कुंडली के चतुर्थ भाव में है। चतुर्थ भाव जनता का है।
स्वतंत्र भारत की कुंडली में चंद्रमा की महादशा में शुक की अंतर्दशा के कारण महिलाओं के लिए सद्भाव, शांति और समृद्धि व उनके पक्ष में कानून बनाने के लिए सरकार पर दबाव होगा। शोक, अप्रिय प्रकरण और बहस, संसदीय हलकों में घोटाले आदि होंगे।
शनि दशम भाव का स्वामी है और वह गोचरवश राहु के साथ एकादश भाव में मीन राशि में युति कर रहा है।
दशम भाव राजा, राजघराना, कुलीन वर्ग, शासक, प्रधानमंत्री, राज्य का मुखिया आदि इस भाव से देखे जाते है।
राहु से राजनीतिक षड्यंत्र, विद्रोह, जासूसी आदि प्रकरण देखा जाता है और यह शनि की तरह व्यवहार करता है।
स्वतंत्र भारत की कुंडली में मंगल गोचरवश तृतीय भाव में कर्क राशि में रहेगा। अतः दुर्घटनाएं, रेलवे, आग, सीमा युद्ध जैसी स्थितियाँ आएगी।
स्वतंत्र भारत की कुंडली में कोट चक्रानुसार 4 अक्टूबर 2024 से 27 दिसंबर 2024 तक राहु के नक्षत्र शतभिषा में गोचर कर रहा शनि स्तम्भ को खंडित करने कर प्रयास करेगा। सरकार को भारी विरोध का सामना करना होगा।
एकादश भाव पश्चिमी ज्योतिष में संसद, प्रतिनिधि सभा का होता है। भारतीय ज्योतिष में संसद को 10वें भाव से देखा जाता है।
अप्रैल 2025 में शुक्र, राहु, बुध व शनि के ग्रह युद्ध की स्थिति का फल यह होगा कि कोई बड़ा वित्तीय घोटाला सरकार को घेरेगा। शेयर मार्केट घोटाला, शिक्षा में घोटाला व बड़ी योजनाओं में घोटाले सामने आएंगे। किसी बड़े षड्यन्त्र का खुलासा होगा। महिलाओं के कोई स्कैन्डल में सरकार की फजीहत होगी। अंतर्राष्ट्रीय सबंध खराब होंगे। बड़ी रेल दुर्घटना होगी व कोई संचार घोटाला सामने आएगा। सरकार का बचना मुश्किल होगा। इस समयावधि में संसद में प्रतिकूल वोट का खतरा, सरकार के लिए बाधाएँ और कठिनाइयाँ। देश की जनता को परिवर्तन झेलना ही पड़ेगा। यह परिवर्तन संसद में मतदान के रूप में हो सकता है या मई 2025 में मध्यावधि चुनाव के रूप में। अन्य राज्यों की सरकारों में भी परिवर्तन होगा।
ग्रह स्थितियाँ परिवर्तन बता रही है। अतः सरकार में परिवर्तन होगा। नई सरकार बनेगी
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स्वतंत्र भारत की 78 वें वर्ष की कुंडली में मुन्था दशम भाव में होने से तथा मुंथेश अष्टम भाव में होने से भी सरकार में परिवर्तन के संकेत हैं।
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भाजपा की कुंडली में जुलाई 2025 में चंद्र महादशा में केतु की अंतर्दशा आएगी। चंद्रमा छठे भाव में नीच राशिस्थ है तथा केतु नवम में होकर चलित चक्रानुसार अष्टम भाव का फल प्रदान करेगा। अतः भाजपा आपसी कलह के कारण बिखर जाएगी।
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NDA सरकार की शपथ ग्रहण कालीन कुंडली को देखें तो बृहस्पति महादश में राहु अंतर्दशा 19 जनवरी 2025 तक है।
NDA सरकार की शपथ ग्रहण कालीन कुंडली में 13 जनवरी 2025 को मंगल जन्म नक्षत्र पुनर्वसु में आकर तथा 6 फरवरी को सूर्य धनिष्ठा नक्षत्र में आकर सरकार को अस्थिर करेगा।
यह सरकार अंतर्कलह के कारण 19 जनवरी 2025 से पूर्व ही बिखरने लग जाएगी और आगे चलकर नई सरकार बन जाएगी।

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इंडिया गठबंधन की विधिवत स्थापना 18 जुलाई 2023 को बैंगलुरु में हुई थी। शनि महादशा में शुक्र अंतर्दशा चलेगी। दोनों ग्रह अच्छी स्थिति में है। इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी।
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नरेंद्र मोदी की कुंडली में 5 जून 2024 से मंगल महादशा में बुध अंतर्दशा है। मंगल लग्नेश के साथ साथ षष्ठेश भी है। बुध अस्त है तथा केतु द्वारा पीड़ित भी है। अतः यह समय तनाव व परेशानियों वाला है। तत्पश्चात् 2 जून 2025 तक मंगल महादशा में केतु की अंतर्दशा होगी जो परेशनीयां बढ़ाएगी। ग्रह स्थिति अनुकूल नहीं है।
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कांग्रेस की कुंडली में 6 मार्च 2025 से शनि की महादशा प्रारंभ हो रही है। अतः पार्टी की शक्ति बढेगी और सत्तासीन होगी।
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अब हम यह विचार करते हैं की प्रधानमंत्री पद तक कौन पहुँच सकता है?

राहुल गांधी की कुंडली में राहु महादशा में शनि अंतर्दशा चल रही है। राहु जो शनि की राशि में और शनि के नवांश में है, की महादशा तथा शनि जो आत्मकारक है, की अन्तर्दशा चल रही है। राहुल गांधी पावरफुल स्थिति में व उच्च पद पर रहेंगे।
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प्रियंका गांधी की कुंडली में 4 मई 2025 से सूर्य महादशा में राहु की अंतर्दशा रहेगी। राहु अष्टम भाव में है। अतः परेशान करेगा। इससे पूर्व की स्थिति अच्छी रहेगी। संसद में इनकी भूमिका होगी।
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मल्लिकार्जुन खरगे की कुंडली में शुक्र-चंद्र व शुक्र-मंगल की दशाएं रहेगी। इनकी कुंडली में शनि, राहु व बृहस्पति की गोचरीय स्थिति भी बहुत अच्छी रहेगी। ये पावरफुल स्थिति में व उच्च पद पर रहेंगे।
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नीतीश कुमार की कुंडली में राहु महादशा में शुक्र की अंतर्दशा 31 मई 2026 तक है। यह अच्छे राजयोग की स्थिति है। ये उच्चतम पद पर जा सकते है।
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अरविन्द केजरीवाल की कुंडली में बृहस्पति महादशा में राहु की अंतर्दशा 18 मार्च 2026 तक कष्टप्रद है। ———————————————————–

आम आदमी पार्टी को शुक्र महादशा में शनि की अंतर्दशा रहेगी। यह पार्टी चुनाव में अच्छी प्रगति करेगी।
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चंद्रबाबु नायडू की कुंडली में 19 जुलाई 2025 तक शनि महादशा में चंद्र की अंतर्दशा है। अप्रैल में प्रारंभ होने वाला शनि का ढैया परेशान करेगा। 19 जुलाई 2025 के बाद ये और भी अच्छी स्थिति में रहेंगे।
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ममता बनर्जी की कुंडली में शनि महादशा में बृहस्पति अंतर्दशा रहेगी जो इनको सत्तासीन रखेगी।
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तृणमूल काँग्रेस की कुंडली में 28 नवंबर 2024 तक राहु महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा है। अतः इस अवधि में तनाव व परेशानियाँ आती रहेगी। तत्पश्चात् 16 दिसंबर 2025 तक राहु महादशा में मंगल अन्तर्दशा में भी सुधार नहीं होगा। इस पार्टी का सही समय 16 दिसंबर 2025 में बृहस्पति की महादशा में आएगा। बृहस्पति आत्मकारक ग्रह भी है। अतः इस अवधि के पश्चात् तृणमूल कांग्रेस की शक्ति बढेगी।
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प्रधानमंत्री पद के लिए मैने आपको संकेत कर दिया है। तीन नेताओं की कुंडली में उच्च पद पर पहुँचने का योग है जिनका विवरण मैने दिया है। प्रामाणिक रूप से ईश्वर ही बात सकता है कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा? यहाँ ज्योतिष की गणनाओं के आधार पर बताया गया है। संकेत दे दिया गया है। देश, काल, परिस्थिति की ज्योतिष में बहुत भूमिका होती है। ग्रंथों में लिखा हुआ है कि राजाओं के घर में उत्पन्न हुए व्यक्तिओं की कुंडली में थोड़ा राजयोग भी अधिक फल प्रदान करता है। आप आकलन कर सकते है।
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