Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo.

Categories
Uncategorized

Durga visa yantra | visa yantra ambaji | chamunda visa yantra | vidweshan | shanti karm part-4

[pdfjs-viewer url=”https://astropark.co.in/wp-content/uploads/2024/11/एकादश-तरंग-1.pdf” attachment_id=”1737″ viewer_width=100% viewer_height=800px fullscreen=true download=false print=false]

Categories
Uncategorized

Durga visa yantra | visa yantra ambaji | chamunda visa yantra | maran uchchatan stambhan part-3

[pdfjs-viewer url=”https://astropark.co.in/wp-content/uploads/2024/11/एकादश-तरंग-1.pdf” attachment_id=”1737″ viewer_width=100% viewer_height=800px fullscreen=true download=false print=false]https://www.youtube.com/watch?v=ixCuLmYpMPM

Categories
Uncategorized

Durga visa yantra | visa yantra ambaji | chamunda visa yantra | akarshan vasheekaran part-2

https://www.youtube.com/watch?v=HduD1WLbI7k

[pdfjs-viewer url=”https://astropark.co.in/wp-content/uploads/2024/11/एकादश-तरंग-1.pdf” attachment_id=”1737″ viewer_width=100% viewer_height=800px fullscreen=true download=false print=false]

Categories
Uncategorized

Durga visa yantra | visa yantra ambaji| chamunda visa yantra | bisa yantra |

https://www.youtube.com/watch?v=FtnNecuQG[pdfjs-viewer url=”https://astropark.co.in/wp-content/uploads/2024/11/एकादश-तरंग.pdf” attachment_id=”1734″ viewer_width=100% viewer_height=800px fullscreen=true download=false print=false]3E

Categories
Uncategorized

Quick marriage mantra | marriage mantra |mantra fast for marriage | कामेशी मन्त्र

https://www.youtube.com/watch?v=11aipIa4FuY

[pdfjs-viewer url=”https://astropark.co.in/wp-content/uploads/2024/11/कामेक्षामन्त्रप्रयोगः-।.pdf” attachment_id=”1728″ viewer_width=100% viewer_height=800px fullscreen=true download=false print=false]

Categories
Uncategorized

Pitru | Pitru dosha | Pitri dosh | Pitra dosha | nivarana | पितृ दोष निवारण | part-2

https://www.youtube.com/watch?v=dqO-[pdfjs-viewer [pdfjs-viewer url=”https://astropark.co.in/wp-content/uploads/2024/11/पितृ-दोष-पर-वापस-आते-हुए.pdf” attachment_id=”1725″ viewer_width=100% viewer_height=800px fullscreen=true download=false print=false]

Categories
Uncategorized

Pitru dosha | Pitri dosh | Pitra dosha nivarana | पितृ दोष निवारण

https://www.youtube.com/watch?v=wXLYs4KJa-A

[pdfjs-viewer url=”https://astropark.co.in/wp-content/uploads/2024/09/पितृ-दोष-पर-वापस-आते-हुए.pdf” attachment_id=”1714″ viewer_width=100% viewer_height=800px fullscreen=true download=false print=false]Pitru dosha | Pitri dosh | Pitra dosha nivarana | पितृ दोष निवारणhttps://www.youtube.com/watch?v=wXLYs4KJa-A

Categories
Uncategorized

Political changes | prediction | in India | राजनैतिक परिवर्तन | भविष्यवाणियाँ |


क्या परिवर्तन का दौर है, सरकारों में होगा परिवर्तन?
क्या आगामी समय में देश की राजनैतिक स्थिति में
परिवर्तन होगा? केंद्र में NDA की सरकार है। देखते हैं कि इस सरकार का भविष्य क्या है? हम ग्रहों की आगे आने वाली गोचर स्थिति पर विचार करते हैं।

-29 मार्च 2025 को शनि मीन राशि में।
-15 मई 2025 –बृहस्पति मिथुन राशि में।
-30 मई 2025 राहु कुम्भ राशि में और केतु सिंह राशि में शुद्ध गति से।

इस गोचर कुंडली में ग्रहों को देख सकते हैं।
एकादश भाव संसद का होता है। प्रथम भाव देश की स्थिरता का व छठा भाव संघर्ष का होता है। दशम भाव प्रधानमंत्री, सरकार व केंद्र सरकार की स्थिरता का होता है। राहु राजनैतिक परिवर्तन देता है। शनि लोकतान्त्रिक प्रक्रिया करता है।
अप्रैल 2025 के अंत से गोचर स्थिति के अनुसार शनि, शुक्र, राहु व बुध मीन राशि में रहेंगे। शनि, शुक्र व राहु ग्रहयुद्ध की स्थिति में रहेंगे। शनि, सूर्य व शुक्र 28 अप्रैल 2025 से सिंह नवांश में रहेंगे। शनि व शुक्र शनि के नक्षत्र उत्तराभाद्रपद में होंगे।
—————————————————————-

स्वतंत्र भारत की कुंडली में शुक्र कुंडली का लग्नेश व षष्ठेश है। शनि दशमेश है, यह लोकतंत्र का कारक ग्रह है।
सिंह राशि इस कुंडली के चतुर्थ भाव में है। चतुर्थ भाव जनता का है।
स्वतंत्र भारत की कुंडली में चंद्रमा की महादशा में शुक की अंतर्दशा के कारण महिलाओं के लिए सद्भाव, शांति और समृद्धि व उनके पक्ष में कानून बनाने के लिए सरकार पर दबाव होगा। शोक, अप्रिय प्रकरण और बहस, संसदीय हलकों में घोटाले आदि होंगे।
शनि दशम भाव का स्वामी है और वह गोचरवश राहु के साथ एकादश भाव में मीन राशि में युति कर रहा है।
दशम भाव राजा, राजघराना, कुलीन वर्ग, शासक, प्रधानमंत्री, राज्य का मुखिया आदि इस भाव से देखे जाते है।
राहु से राजनीतिक षड्यंत्र, विद्रोह, जासूसी आदि प्रकरण देखा जाता है और यह शनि की तरह व्यवहार करता है।
स्वतंत्र भारत की कुंडली में मंगल गोचरवश तृतीय भाव में कर्क राशि में रहेगा। अतः दुर्घटनाएं, रेलवे, आग, सीमा युद्ध जैसी स्थितियाँ आएगी।
स्वतंत्र भारत की कुंडली में कोट चक्रानुसार 4 अक्टूबर 2024 से 27 दिसंबर 2024 तक राहु के नक्षत्र शतभिषा में गोचर कर रहा शनि स्तम्भ को खंडित करने कर प्रयास करेगा। सरकार को भारी विरोध का सामना करना होगा।
एकादश भाव पश्चिमी ज्योतिष में संसद, प्रतिनिधि सभा का होता है। भारतीय ज्योतिष में संसद को 10वें भाव से देखा जाता है।
अप्रैल 2025 में शुक्र, राहु, बुध व शनि के ग्रह युद्ध की स्थिति का फल यह होगा कि कोई बड़ा वित्तीय घोटाला सरकार को घेरेगा। शेयर मार्केट घोटाला, शिक्षा में घोटाला व बड़ी योजनाओं में घोटाले सामने आएंगे। किसी बड़े षड्यन्त्र का खुलासा होगा। महिलाओं के कोई स्कैन्डल में सरकार की फजीहत होगी। अंतर्राष्ट्रीय सबंध खराब होंगे। बड़ी रेल दुर्घटना होगी व कोई संचार घोटाला सामने आएगा। सरकार का बचना मुश्किल होगा। इस समयावधि में संसद में प्रतिकूल वोट का खतरा, सरकार के लिए बाधाएँ और कठिनाइयाँ। देश की जनता को परिवर्तन झेलना ही पड़ेगा। यह परिवर्तन संसद में मतदान के रूप में हो सकता है या मई 2025 में मध्यावधि चुनाव के रूप में। अन्य राज्यों की सरकारों में भी परिवर्तन होगा।
ग्रह स्थितियाँ परिवर्तन बता रही है। अतः सरकार में परिवर्तन होगा। नई सरकार बनेगी
————————————————————

स्वतंत्र भारत की 78 वें वर्ष की कुंडली में मुन्था दशम भाव में होने से तथा मुंथेश अष्टम भाव में होने से भी सरकार में परिवर्तन के संकेत हैं।
————————————————————

भाजपा की कुंडली में जुलाई 2025 में चंद्र महादशा में केतु की अंतर्दशा आएगी। चंद्रमा छठे भाव में नीच राशिस्थ है तथा केतु नवम में होकर चलित चक्रानुसार अष्टम भाव का फल प्रदान करेगा। अतः भाजपा आपसी कलह के कारण बिखर जाएगी।
——————————————————–

NDA सरकार की शपथ ग्रहण कालीन कुंडली को देखें तो बृहस्पति महादश में राहु अंतर्दशा 19 जनवरी 2025 तक है।
NDA सरकार की शपथ ग्रहण कालीन कुंडली में 13 जनवरी 2025 को मंगल जन्म नक्षत्र पुनर्वसु में आकर तथा 6 फरवरी को सूर्य धनिष्ठा नक्षत्र में आकर सरकार को अस्थिर करेगा।
यह सरकार अंतर्कलह के कारण 19 जनवरी 2025 से पूर्व ही बिखरने लग जाएगी और आगे चलकर नई सरकार बन जाएगी।

—————————————————————-

इंडिया गठबंधन की विधिवत स्थापना 18 जुलाई 2023 को बैंगलुरु में हुई थी। शनि महादशा में शुक्र अंतर्दशा चलेगी। दोनों ग्रह अच्छी स्थिति में है। इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी।
—————————————————————-

नरेंद्र मोदी की कुंडली में 5 जून 2024 से मंगल महादशा में बुध अंतर्दशा है। मंगल लग्नेश के साथ साथ षष्ठेश भी है। बुध अस्त है तथा केतु द्वारा पीड़ित भी है। अतः यह समय तनाव व परेशानियों वाला है। तत्पश्चात् 2 जून 2025 तक मंगल महादशा में केतु की अंतर्दशा होगी जो परेशनीयां बढ़ाएगी। ग्रह स्थिति अनुकूल नहीं है।
————————————————————–

कांग्रेस की कुंडली में 6 मार्च 2025 से शनि की महादशा प्रारंभ हो रही है। अतः पार्टी की शक्ति बढेगी और सत्तासीन होगी।
———————————————————-
अब हम यह विचार करते हैं की प्रधानमंत्री पद तक कौन पहुँच सकता है?

राहुल गांधी की कुंडली में राहु महादशा में शनि अंतर्दशा चल रही है। राहु जो शनि की राशि में और शनि के नवांश में है, की महादशा तथा शनि जो आत्मकारक है, की अन्तर्दशा चल रही है। राहुल गांधी पावरफुल स्थिति में व उच्च पद पर रहेंगे।
————————————————————-

प्रियंका गांधी की कुंडली में 4 मई 2025 से सूर्य महादशा में राहु की अंतर्दशा रहेगी। राहु अष्टम भाव में है। अतः परेशान करेगा। इससे पूर्व की स्थिति अच्छी रहेगी। संसद में इनकी भूमिका होगी।
————————————————————–

मल्लिकार्जुन खरगे की कुंडली में शुक्र-चंद्र व शुक्र-मंगल की दशाएं रहेगी। इनकी कुंडली में शनि, राहु व बृहस्पति की गोचरीय स्थिति भी बहुत अच्छी रहेगी। ये पावरफुल स्थिति में व उच्च पद पर रहेंगे।
———————————————————–

नीतीश कुमार की कुंडली में राहु महादशा में शुक्र की अंतर्दशा 31 मई 2026 तक है। यह अच्छे राजयोग की स्थिति है। ये उच्चतम पद पर जा सकते है।
————————————————————

अरविन्द केजरीवाल की कुंडली में बृहस्पति महादशा में राहु की अंतर्दशा 18 मार्च 2026 तक कष्टप्रद है। ———————————————————–

आम आदमी पार्टी को शुक्र महादशा में शनि की अंतर्दशा रहेगी। यह पार्टी चुनाव में अच्छी प्रगति करेगी।
—————————————————————-

चंद्रबाबु नायडू की कुंडली में 19 जुलाई 2025 तक शनि महादशा में चंद्र की अंतर्दशा है। अप्रैल में प्रारंभ होने वाला शनि का ढैया परेशान करेगा। 19 जुलाई 2025 के बाद ये और भी अच्छी स्थिति में रहेंगे।
———————————————————–

ममता बनर्जी की कुंडली में शनि महादशा में बृहस्पति अंतर्दशा रहेगी जो इनको सत्तासीन रखेगी।
———————————————————–

तृणमूल काँग्रेस की कुंडली में 28 नवंबर 2024 तक राहु महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा है। अतः इस अवधि में तनाव व परेशानियाँ आती रहेगी। तत्पश्चात् 16 दिसंबर 2025 तक राहु महादशा में मंगल अन्तर्दशा में भी सुधार नहीं होगा। इस पार्टी का सही समय 16 दिसंबर 2025 में बृहस्पति की महादशा में आएगा। बृहस्पति आत्मकारक ग्रह भी है। अतः इस अवधि के पश्चात् तृणमूल कांग्रेस की शक्ति बढेगी।
—————————————————————
प्रधानमंत्री पद के लिए मैने आपको संकेत कर दिया है। तीन नेताओं की कुंडली में उच्च पद पर पहुँचने का योग है जिनका विवरण मैने दिया है। प्रामाणिक रूप से ईश्वर ही बात सकता है कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा? यहाँ ज्योतिष की गणनाओं के आधार पर बताया गया है। संकेत दे दिया गया है। देश, काल, परिस्थिति की ज्योतिष में बहुत भूमिका होती है। ग्रंथों में लिखा हुआ है कि राजाओं के घर में उत्पन्न हुए व्यक्तिओं की कुंडली में थोड़ा राजयोग भी अधिक फल प्रदान करता है। आप आकलन कर सकते है।
———————————————————-

Categories
Uncategorized

Tantra | black magic | sadguru | shiva | तंत्र part-1

https://www.youtube.com/watch?v=bq2Uat-GqVE&t=36s
Tantra | black magic | sadguru | shiva | तंत्र
तंत्र शब्द का अर्थ एक ऐसी प्रक्रिया का वर्णन करना है जिसके माध्यम से शरीर को सभी प्रकार की बीमारियों और अपरिहार्य बुराइयों से बचाया जा सकता है। प्राचीन हिंदू ग्रंथों में तंत्र का पहला संदर्भ अथर्ववेद के नरसिंह उपनिषद में मिलता है।
तांत्रिक साधनाएं तुरंत प्रभाव पैदा करती हैं और ऐसा माना जाता है कि इसके माध्यम से असंभव को भी प्राप्त किया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि तंत्र शास्त्र (तंत्र विज्ञान) भगवान शिव के मुख से उत्पन्न हुआ है और कुल 64 प्रकार का है। तंत्र के कुछ उपतंत्र या छोटे संस्करण भी हैं। तंत्र में ऊर्जा के दश रूपों (काली, तारा, षोडसी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला) की पूजा अत्यधिक प्रचलित है।
तन्त्र साहित्य अत्यन्त विशाल है। प्राचीन समय के दुर्वासा, अगस्त्य, विश्वामित्र, परशुराम, बृहस्पति, वशिष्ठ, नंदिकेश्वर, दत्तात्रेय महर्षि लोमश ऋषियों ने तन्त्र के अनेक ग्रन्थों का प्रणयन किया।
ऐतिहासिक युग में शंकराचार्य के परम गुरु गौडपादाचार्य का नाम उल्लेखनीय है। उनके द्वारा रचित ‘सुभगोदय स्तुति’ एवं ‘श्रीविद्यारत्न सूत्र’ प्रसिद्ध हैं। मध्ययुग में तांत्रिक साधना एवं साहित्य रचना में विद्वानों का प्रवेश हुआ था।
लक्ष्मणदेशिकेन्द्र: ये शादातिलक, ताराप्रदीप आदि ग्रथों के रचयिता थे।
आदि शंकराचार्य: वेदाङ्गमार्ग के संस्थापक सुप्रसिद्ध भगवान शंकराचार्य वैदिक संप्रदाय के अनुरूप तांत्रिक संप्रदाय के भी उपदेशक थे।
परम्परा से शंकराचार्य के रचित प्रसिद्ध तांत्रिक ग्रंथ इस प्रकार हैं-
1-प्रपंचसार,
2-परमगुरु गौडपाद की सुभगोदय स्तुति की टीका,
3-ललितात्रिशतीभाष्य,
4- आनंदलहरी अथवा सौंदर्यलहरी नामक स्तोत्र।
पृथिवीधराचार्य अथवा ‘पृथ्वीधराचार्य: इन्होंने ‘भुवनेश्वरी स्तोत्र’ तथा ‘भुवनेश्वरी रहस्य’ की रचना की थी।
चरणस्वामी, सरस्वती तीर्थ, राघव भट्ट, पुण्यानंद, अमृतानंदनाथ, त्रिपुरानन्दनाथ, सुन्दराचार्य, विद्यानंदनाथ, नित्यानन्दनाथ, सर्वानन्दनाथ, निजानंद प्रकाशानंद मल्लिकार्जुन योगीभद्र, ब्रह्मानन्द, पूर्णानन्द, देवनाथ ठाकुर तर्कपंचानन, गोरक्ष, सुभगानन्द नाथ, कृष्णानन्द आगमबागीश, आगमाचार्य गौड़ीय शंकर, भास्कर राय, प्रेमनिधि पन्थ, उमानन्द नाथ, शंकरानन्द नाथ, रामेश्वर, अप्पय दीक्षित, माधवानन्द नाथ, क्षेमानन्द, गीर्वाणेन्द्र सरस्वती, रघुनाथ तर्कवागीश, महादेव विद्यावागीश, यदुनाथ चक्रवर्ती, नरसिंह ठाकुर, गोविन्द न्यायवागीश, काशीनाथ तर्कालङ्कार, शिवानन्द गोस्वामी आदि।

तंत्र को सात मुख्य ‘आचार’ या अनुशासनों के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है:
तंत्र में तीन प्रकार के भक्त होते हैं- पशु (पशु या बंधन में पड़ा हुआ), वीर और दिव्य।

पशु भाव:

1. वेदाचार
2. वैष्णवाचार
3. शैवाचार
4. दक्षिणाचार
————-
वीर भाव:

5. वामाचार
6. सिद्धांताचार
————-
दिव्य भाव:

7. कोलाचार।
————–
शाक्तागम ग्रन्थों यथा विश्वसारतंत्र, महाचीनाचार तंत्र, कुलार्णव तंत्र, महानिर्वाण तंत्र, समयाचार तंत्र तथा सर्वोल्लास तंत्र में विभिन्न भावों तथा आचारों के सम्बन्ध में विस्तारपूर्वक लिखा गया है। कुलार्णव तंत्र के अनुसार –
‘‘सर्वेम्यश्चोत्तमा वेदा-वेदेम्यो बैष्णवं परम
वैष्णवादुत्तमं शैवं-शैवादक्षिण मुत्तमम्
दक्षिणात् उत्तमं वामं-वामात् सिद्धान्तमुत्तमम्
सिद्धान्तात् उत्तमं कौलं-कौलात् परतरं नहि।।’’
–कुलार्णव तंत्रम्, उल्लाश 2, श्लोक 7,8
……….
यह श्लोक विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं की श्रेष्ठता को दर्शाता है। इसमें कहा गया है कि:
• सब से उत्तम वेदाचार है।
• वेदाचार से उत्तम वैष्णवाचार है।
• वैष्णवाचार से श्रेष्ठ शैवाचार है।
• शैवाचार से श्रेष्ठ दक्षिणाचार है।
• दक्षिणाचार से श्रेष्ठ वामाचार है।
• वामाचार से श्रेष्ठ सिद्धांताचार है।
• सिद्धांताचार से श्रेष्ठ कौलाचार है।
इस प्रकार, यह श्लोक विभिन्न परंपराओं की महत्ता को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है।
इन सात आचारों का संक्षिप्त विवरण:
1. वेदाचार:
इस आचार में भक्त वेदों और अन्य वेदमूलक शास्त्रों जैसे स्मृतियों, पुराणों आदि में बताए गए तरीकों का पालन करते हुए आराध्य देवता की सकाम पूजा (कुछ विशिष्ट लक्ष्यों को प्राप्त करने की इच्छा से) करता है।

2. वैष्णवाचार:
इस आचार में साधक वेदाचार में बताए गए नियमों का पालन करता है और भगवान विष्णु की पूजा करता है। वह अपने सभी कर्म भगवान विष्णु को समर्पित करता है और हर वस्तु में नित्य भगवान विष्णु के दर्शन करता है। इस आचार में साधक को शुद्धता-अशुद्धता के कुछ सख्त नियमों का पालन करना होता है।

3. शैवाचार:
इस आचार में भक्त शिव-शक्ति की पूजा करने के लिए वेदाचार नियमों का पालन करता है। यहाँ भक्त हर वस्तु में शिव को देखता है।

4. दक्षिणाचार:
प्राचीन काल में दक्षिणामूर्ति मुनि ने इस मार्ग को अपनाया था और इसीलिए इसे यह कहा जाता है।
दक्षिणाचार का अर्थ है अनुकूल आचरण। दूसरे शब्दों में, आचरण का पालन करने से देवता और पितृ हमारे अनुकूल हो जाते हैं, देवी प्रसन्न होती हैं और हमारे अनुकूल हो जाती हैं, यही दक्षिणाचार है।
इस आचार में, वेदाचार के नियमों का पालन करते हुए, भक्त देवी की पूजा करता है।
इन चारों आचारों तक पशु भाव माना गया है।
———————————————–

Categories
Uncategorized

Political line in | Palmistry | हस्तरेखा विज्ञान | में राजनीतिक रेखा |


राजनीति में सफलता की रेखाएं।
हथेली में अनेक रेखाएं व चिन्ह होते हैं जो यह बताते हैं कि व्यक्ति राजनीति में सफल होगा या नहीं। हथेली में विधायक, सांसद या मंत्री बनने का योग है या नहीं? हाथ के आकार- प्रकार से भी इसका पता चलता है। आइए इस विषय पर बात करते हैं।
प्रगति के लिए हाथ की हथेली की आधारभूत संरचना तो अच्छी होनी आवश्यक है ही यथा, ग्रह पर्वतों का मजबूत होना, रेखाओं का स्पष्ट और लंबा होना, अच्छी भाग्य रेखा होना, विशेष तौर पर अच्छी और लंबी सूर्य रेखा होना व कई अन्य चिन्ह यथा मत्स्य, त्रिभुज, ध्वज आदि का होना।
इसके अलावा हम बात करते हैं सूर्य रेखा के बारे में। सूर्य यश और राज्य का कारक होता है।
• जिन हथेलियों में लंबी व स्पष्ट सूर्य रेखा हो और सूर्य रेखा से ऊपर की ओर रेखाएं जा रही हो तो यह बहुत अच्छी मानी गई है। सूर्य रेखा से नीचे की ओर रेखाएं जा रही हो तो यह सूर्य के गुणों में कमी करती है।
• कोई रेखा सूर्य पर्वत से निकलकर गुरु पर्वत तक जाए तो राजनीति में सफलता प्राप्त होती है।
• सूर्य पर्वत से निकलकर कोई रेखा मंगल पर्वत तक जाए तो व्यक्ति राजनीति में सफल होता है। वह निर्भीक और कर्मठ राजनीतिज्ञ होता है।
• सूर्य राज्य का ग्रह होता है तथा शनि लोकतंत्र का कारक होता है। सूर्य पर्वत से निकलकर कोई रेखा यदि शनि पर्वत तक जाए या शनि पर्वत से कोई रेखा सूर्य पर्वत तक जाए तो ऐसे लोग राजनीति में विशेष योग्यता रखते हैं।
• सूर्य रेखा बुध पर्वत तक जाए तो ऐसे व्यक्ति को बुद्धिमान व चतुर राजनीतिज्ञ बनती है।
• यदि मस्तिष्क रेखा गुरु पर्वत की ओर से निकल रही हो तो व्यक्ति अच्छा राजनीतिज्ञ होता है।
• यदि बृहस्पति पर्वत भी विकसित हो तो और भी अच्छी प्रगति होती है।
• बुध या गुरु पर्वत पर त्रिभुज हो तो राजनीति में सफलता प्राप्त होती है।
• गुरु या शुक्र पर्वत पर त्रिशूल या ध्वज का चिन्ह हो तो वह प्रसिद्धि प्राप्त करता है।
• यदि मस्तिष्क रेखा और भाग्य रेखा पूर्ण लंबाई लिए हुए हो तथा मंगल पर्वत विकसित हो तो वह व्यक्ति सफल राजनीतिज्ञ होता है।
• इन लक्षणों के साथ यदि हथेली में एक से अधिक स्थान पर मत्स्य अर्थात मछली का चिन्ह हो तो व्यक्ति सफल राजनीतिज्ञ होता है और वह खूब धनी व प्रसिद्ध होता है।
• यदि जीवन रेखा वह मस्तिष्क रेखा के प्रारंभिक स्थान पर दूरी हो तो व्यक्ति अपने सिद्धांतों के आधार पर चलता है। वह अपनी विचारधारा के आधार पर चलता है। ऐसे व्यक्ति अपने विचार और दृढ़ता के कारण संघर्ष करते हैं तथा सफल राजनीतिज्ञ होते हैं।